Sunday, 5 January 2014

" गुलाबी-सी ठंड "

हल्का, नरम, गुलाबी
दुशाला ओढ़े हुए
ठण्ड ने
दबे पाँव आकर
हौले-से दस्तक दी ...
आहट सुनकर
देसी गुलाब की कलियों ने
गुलमेंहदी के फूलों
की ओर देखा ...
और दोनों
इठलाते हुए
धीमे-धीमे
मुस्कुराने लगे ...
तभी
शोर मचाते हुए
चंचल मैनाओं के झुण्ड ने
नन्हीं-सी, फुदकती,
ख़ूबसूरत आँखों वाली
खंजन को देखा
और चहचहाते हुए
नव-आगंतुक  के लिए
स्वागत गान करने लगी ... !!
© कंचन पाठक.
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Published in Amar Ujala Rupayan (6 December 2013)